भारत में स्टूडेंट्स के लिए ज़रूरी बातें
भारत में कैंपस प्लेसमेंट ज़्यादातर कॉलेज के प्लेसमेंट सेल से होता है, जहाँ पहली छंटनी अक्सर CGPA, ब्रांच और बैकलॉग के आधार पर होती है। वेबसाइट इस कट के बाद काम आती है, यानी इंटरव्यू में और Naukri, LinkedIn या कंपनी के करियर पेज पर ऑफ़-कैंपस आवेदन में। कई इंटर्नशिप सीनियर्स और एलुमनाई के रेफ़रल से मिलती हैं, और वे उसी को आगे बढ़ाते हैं जिसका काम एक लिंक पर दिख जाए। अगर आप किसी छोटे शहर या कम जाने-माने कॉलेज से हैं, तो साफ़ पोर्टफ़ोलियो यह दूरी कम कर सकता है। अपना आधार नंबर, जन्मतिथि, घर का पता या मार्कशीट ऑनलाइन न डालें; ये दस्तावेज़ सिर्फ़ तब दें जब कंपनी मांगे।
आम गलतियाँ जिनसे बचें
- लैब मैनुअल या ग्रुप रिपोर्ट से प्रोजेक्ट का विवरण कॉपी करना। हर प्रोजेक्ट अपने शब्दों में लिखें और उस हिस्से पर ज़ोर दें जो आपने खुद किया।
- एक ऑनलाइन कोर्स के बाद ही “मशीन लर्निंग” को स्किल बता देना। स्किल किसी प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करके दिखाएं, वरना उसे “अभी सीख रहा हूँ” में रखें।
- मज़ाकिया निकनेम वाला ईमेल या साइट का नाम रखना। अपने असली नाम वाला प्रोफ़ेशनल ईमेल इस्तेमाल करें जो रिक्रूटर की स्क्रीन पर ठीक लगे।
- प्लेसमेंट के बाद साइट को भूल जाना। हर नई इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट या सर्टिफ़िकेट एक हफ़्ते के अंदर जोड़ें, जब तक बातें ताज़ा याद हों।