भारत में नर्सों के लिए ज़रूरी बातें
भारत में नर्स अपनी स्टेट नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर होती हैं, और दूसरे राज्य में काम करने के लिए आमतौर पर वहां भी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल का एक नेशनल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और ट्रैकिंग सिस्टम भी है, जिसके बारे में रिक्रूटर पूछ सकते हैं। अस्पताल और एजेंसियां ज़्यादातर Naukri, LinkedIn, WhatsApp ग्रुप और रेफ़रल से नर्स ढूंढती हैं। गल्फ़, UK और दूसरे देशों के लिए भर्ती चलती रहती है, पर फ़र्ज़ी एजेंसियां भी कम नहीं, इसलिए अपनी जांचने लायक जानकारी वेबसाइट पर रखें और पासपोर्ट की कॉपी अनजान लोगों को न भेजें। नर्सिंग कोड ऑफ़ एथिक्स और अस्पताल की सोशल मीडिया पॉलिसी के तहत मरीज़ों की फ़ोटो या केस की जानकारी न डालें। मलयालम, तमिल, हिंदी, कन्नड़ या इंग्लिश, जो भाषाएं आती हैं, ज़रूर लिखें।
आम गलतियाँ जिनसे बचें
- बस “ICU में काम किया” लिख देना। ICU का प्रकार, जैसे मेडिकल, सर्जिकल, कार्डियक या नियोनेटल, बेड की संख्या और जो उपकरण आपने खुद संभाले, वे सब साफ़ लिखें।
- वार्ड में खींची गई फ़ोटो लगाना। पीछे दिख रहा मॉनिटर या रिस्टबैंड भी मरीज़ की पहचान बता सकता है; सादी प्रोफ़ेशनल फ़ोटो रखें और कोई क्लिनिकल तस्वीर न डालें।
- सुविधा के लिए पासपोर्ट, रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट या आधार की स्कैन कॉपी पब्लिश करना। इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है; सिर्फ़ ज़रूरी नंबर लिखें और कॉपी सिर्फ़ जांचे हुए एम्प्लॉयर को दें।
- एक्सपायर हो चुके BLS या ACLS सर्टिफ़िकेट लिस्ट में छोड़ देना। वैलिडिटी की तारीख़ लिखें और रिन्यू होते ही अपडेट करें, क्योंकि रिक्रूटर देखते हैं कि सर्टिफ़िकेट अभी मान्य है या नहीं।