भारत में रियल एस्टेट एजेंटों के लिए ज़रूरी बातें
RERA कानून के तहत जो एजेंट RERA में रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की बिक्री करवाते हैं, उन्हें अपने राज्य की रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में रजिस्टर होना होता है, और ज़्यादातर राज्य चाहते हैं कि यह नंबर विज्ञापनों, वेबसाइट और मार्केटिंग सामग्री पर दिखे। रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट का अपना RERA नंबर भी होता है, जिसे उसके हर विज्ञापन में लिखना चाहिए। नियम, फ़ीस और रिन्यूअल की अवधि हर राज्य में अलग हैं, इसलिए अपनी राज्य अथॉरिटी के पोर्टल पर ताज़ा नियम देखें। खरीदार अक्सर पोर्टल पर एजेंट का नंबर मिलाते हैं, Google Maps पर ऑफ़िस के रिव्यू पढ़ते हैं और पड़ोसियों से पूछते हैं। NRI खरीदार और मालिक लगभग पूरी तरह ऑनलाइन जाँच पर भरोसा करते हैं।
आम गलतियाँ जिनसे बचें
- RERA रजिस्ट्रेशन नंबर न लिखना या पुराना, एक्सपायर्ड नंबर दिखाना। मौजूदा नंबर साफ़ जगह पर रखें और रिन्यू होते ही उसे अपडेट करें।
- बिक चुके फ़्लैट को व्यस्त दिखने के लिए लिस्टिंग में छोड़ देना। इन पर कॉल करने वाले खरीदार का भरोसा टूटता है, इसलिए हर हफ़्ते उन्हें “सोल्ड” मार्क करें या हटाएं।
- “पक्का अप्रिसिएशन” या “तय रेंटल रिटर्न” जैसे दावे करना। लोकेशन की खूबियाँ ईमानदारी से बताएं और कीमत के बारे में फ़ैसला खरीदार पर छोड़ें।
- सिर्फ़ बिल्डर ब्रोशर की तस्वीरें और 3D रेंडर लगाना, और सुपर बिल्ट-अप एरिया बिना कार्पेट एरिया के लिखना। असली फ़्लैट की अपनी फ़ोटो और कार्पेट एरिया पहले दें।